आदेश की अवहेलना पर स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

जबलपुर । जिले में प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के घेरे में आए संविदा जिला कार्यक्रम प्रबंधक और एक फार्मासिस्ट ने कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी अपनी नई पदस्थापना पर उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। इन दोनों कर्मचारियों पर विभाग के भीतर 93 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी के आरोप हैं, जिसके चलते प्रशासन ने उनके विरुद्ध कड़े कदम उठाए थे।

​सिहोरा सिविल अस्पताल में ज्वाइनिंग से किया किनारा

​कलेक्टर द्वारा जारी किए गए स्थानांतरण आदेश के तहत संविदा जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी और फार्मासिस्ट जवाहर लोधी को सिहोरा के सिविल अस्पताल में तत्काल प्रभाव से अपनी सेवाएं देनी थीं। प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार इन्हें निर्धारित तिथि तक कार्यभार संभालना अनिवार्य था। हालांकि, 11 अप्रैल की समय सीमा बीत जाने के बाद भी इन दोनों ने सिहोरा पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। आदेशों की इस तरह खुली अनदेखी को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है और इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है।

​मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी ने सीएमएचओ को भेजी रिपोर्ट

​सिहोरा सिविल अस्पताल के प्रभारी मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील लटियार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी को प्रेषित कर दी है। इस पत्र के माध्यम से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है कि आदित्य तिवारी और जवाहर लोधी ने अब तक सिहोरा में अपनी ज्वाइनिंग नहीं दी है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में की गई कार्रवाई भी कलेक्टर के प्रत्यक्ष निर्देश पर ही आधारित थी, इसलिए अब आगामी कदम भी जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही उठाए जाएंगे।

​कलेक्टर की वापसी के साथ ही बड़ी कार्रवाई के संकेत

​प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस अवहेलना को लेकर फाइल तैयार कर ली गई है। कलेक्टर के मुख्यालय लौटते ही इन दोनों कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई होने की प्रबल संभावना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बीच स्थानांतरण आदेश का पालन न करना स्थिति को और अधिक जटिल बना सकता है। फिलहाल विभाग को उच्च अधिकारियों के अंतिम आदेश का इंतजार है, जिसके बाद निलंबन या संविदा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

Tags

Leave a Reply

Ad with us

Contact us : admin@000miles.com

Admin

Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

Categories

error: Content is protected !!