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कांग्रेस का ‘ऑपरेशन क्लीन’: निष्क्रिय पदाधिकारियों की होगी छुट्टी, जमीन पर काम करने वालों को मिलेगी कमान

जबलपुर। मप्र में आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस संगठन पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ गया है। पार्टी नेतृत्व ने अब उन पदाधिकारियों पर नकेल कसने का निर्णय लिया है जो पद संभालने के बाद भी धरातल पर सक्रिय नहीं हैं। प्रदेश नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि संगठन में केवल उन्हीं चेहरों को जगह दी जाएगी जो जमीनी स्तर पर पार्टी की विचारधारा और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का माद्दा रखते हैं। इसी रणनीति के तहत युवा कांग्रेस ने उन निर्वाचित महासचिवों और सचिवों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है, जिनका प्रदर्शन पिछले समय में संतोषजनक नहीं रहा है।

​रिपोर्ट के आधार पर होगी की कार्रवाई

​संगठन की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए जिला प्रभारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के पदाधिकारियों के कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। यह रिपोर्ट 1 सप्ताह के भीतर तैयार कर राष्ट्रीय संगठन को भेजी जाएगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन युवाओं को आगे लाना है जो बिना किसी औपचारिक पद के भी निरंतर जनहित के मुद्दों पर सक्रिय हैं। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि पद पर बैठकर काम न करने वालों को हटाकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।

​सरकार की नीति के विरोध की प्लानिंग

​संगठन ने केवल आंतरिक सुधारों पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की है। रणनीति के अनुसार 13 अप्रैल को जबलपुर में एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह प्रदर्शन भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील के विरोध में केंद्रित रहेगा। इस आंदोलन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब विशेष रूप से शामिल होंगे। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए युवा कांग्रेस अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने और जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

​पंचायत और वार्ड स्तर पर टीम का गठन

​युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मितेन्द्र दर्शन सिंह ने पदभार ग्रहण करने के बाद संगठन की मजबूती के लिए हर पंचायत और वार्ड स्तर पर युवा कार्यकर्ताओं की टीम बनाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है कि कई स्थानों पर अभी तक इस दिशा में संतोषजनक काम नहीं हुआ है। इसके लिए जिला अध्यक्षों से लेकर प्रभारी और प्रदेश पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। मंगलवार को भोपाल में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में इस लक्ष्य को जल्द पूरा करने और पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार पर बल दिया गया।

​भोपाल जिलाध्यक्ष का क्या है प्रकरण

​बैठक के दौरान भोपाल के जिला अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए अंकित दुबे का मामला भी प्रमुखता से उठा। अंकित दुबे के निर्वाचन के बाद भी उन्हें पद से हटाकर दूसरे स्थान पर रहे अजीत खत्री को अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा गया था। इस मुद्दे पर बैठक में काफी गहमागहमी हुई और पदाधिकारियों ने जल्द निर्णय लेने की मांग की। संगठन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इस पूरे प्रकरण की समीक्षा संगठन की निर्वाचन इकाई कर रही है और इस पर शीघ्र ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो सके।

​अनुशासनहीनता पर संगठन का सख्त रुख

​प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बैठक के दौरान पदाधिकारियों से उनके कामकाज का फीडबैक मांगा। इस दौरान टीकमगढ़ से आए कुछ पदाधिकारियों ने पूर्व अध्यक्ष कुणाल चौधरी के समर्थकों से जुड़ी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। हालांकि, नेतृत्व ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए अनुशासन पर जोर दिया है। संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सभी को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आना चाहिए। पार्टी के भीतर किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संगठन के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

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