वेटरनरी कॉलेज डीन कार्यालय के सामने परिवार संग अनशन पर बैठे प्रोफेसर

नानाजी देशमुख वेटरनरी विवि में आवास आवंटन पर मचा घमासान, प्रोफेसर ने लगाए गंभीर आरोप और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

जबलपुर। नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अव्यवस्था और आवास आवंटन के विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। विश्वविद्यालय के भीतर प्रोफेसरों और प्रबंधन के बीच चल रही खींचतान गुरुवार को उस समय सार्वजनिक हो गई जब वेटरनरी कॉलेज के गायनिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. गिरीश मिश्रा अपने परिवार के साथ धरने पर बैठ गए। सिविल लाइन स्थित डीन कार्यालय के सामने हुए इस घटनाक्रम से विश्वविद्यालय प्रशासन में खलबली मच गई।
-​आवास आवंटन में पक्षपात का आरोप
​डॉ. गिरीश मिश्रा ने डीन डॉ. आरके शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उनका स्थानांतरण इस कॉलेज में हुआ था, तब उन्हें शासकीय आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए उन्होंने 1 अगस्त 2025 को औपचारिक आवेदन भी जमा किया था। प्रोफेसर का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उन लोगों को प्राथमिकता दे रहा है जिनके पास पहले से ही जबलपुर शहर में निजी मकान मौजूद हैं। उन्होंने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक जरूरतमंदों को दरकिनार कर रसूखदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
-​एक कमरे में रहने की मजबूरी
​प्रोफेसर स्तर के अधिकारी होने के बावजूद डॉ. गिरीश मिश्रा वर्तमान में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आवास न मिलने के कारण वे एक छोटे से कमरे में रहने को मजबूर हैं। परिवार के साथ इस तरह के माहौल में गुजर-बसर करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी मानसिक और शारीरिक परेशानी के चलते उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों के साथ डीन कार्यालय के समक्ष अनशन पर बैठने का निर्णय लेना पड़ा। उनका दावा है कि वे लंबे समय से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
​-ऐसे हुई अनशन की समाप्ति
​मामले की गंभीरता और विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते हंगामे को देखते हुए विवि प्रशासन सक्रिय हुआ। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. रामकिंकर मिश्रा ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर प्रोफेसर से चर्चा की और फोन के माध्यम से भी समझाइश दी। प्रशासन के आश्वासन के बाद डॉ. गिरीश मिश्रा ने अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद करीब एक घंटे तक अधिकारियों के बीच प्राथमिक बैठक हुई। विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव ने स्पष्ट किया है कि फैकल्टी की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
-​कुलगुरु की अध्यक्षता में होगा निर्णय
​आवास आवंटन के इस विवाद को सुलझाने के लिए अब उच्च स्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के कुलगुरु शहर से बाहर हैं। उनके लौटते ही एक विशेष समिति की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें डॉ. गिरीश मिश्रा द्वारा लगाए गए आरोपों और आवास आवंटन की सूची की समीक्षा की जाएगी। डॉ. रामकिंकर मिश्रा के अनुसार, शासकीय नियमों के तहत ही पात्र और जरूरतमंद फैकल्टी सदस्यों को आवास आवंटित किए जाएंगे। इस बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी नीतियों में बदलाव करता है या नहीं।

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