
इंदौर।
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में हिंदू पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के समक्ष कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। इस मामले में मुख्य रूप से वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों को आधार बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान रखे गए प्रमुख बिंदु
- ‘समरांगण सूत्रधार’ का प्रमाण: हिंदू पक्ष ने राजा भोज द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का हवाला दिया। दलील दी गई कि भोजशाला की वास्तुकला और वहां मौजूद स्तंभ इस ग्रंथ में वर्णित प्राचीन शिल्प परंपरा और हिंदू वास्तुकला के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
- शिल्प और वास्तुकला: कोर्ट में यह पक्ष रखा गया कि परिसर की बनावट, वहां उकेरे गए चिह्न और खंभों पर मौजूद कलाकृतियां स्पष्ट रूप से एक प्राचीन सरस्वती मंदिर (भोजशाला) होने का प्रमाण देती हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह एक शैक्षणिक संस्थान और मंदिर था, जिसे बाद में परिवर्तित करने की कोशिश की गई।
- एएसआई (ASI) सर्वे का महत्व: इन दलीलों के साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि भौतिक साक्ष्य और प्राचीन ग्रंथ एक ही दिशा में इशारा करते हैं।
- ऐतिहासिक साक्ष्य: प्राचीन शिलालेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह तर्क दिया गया कि यह स्थान सदियों से हिंदू संस्कृति और शिक्षा का केंद्र रहा है।
अदालत इन तमाम साक्ष्यों और दलीलों की समीक्षा कर रही है ताकि इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके।


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