
कार्तिकेय सिंह चौहान को नोटिस जारी कर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
जबलपुर। राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहे मानहानि विवाद में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान निचली अदालत की पूरी ऑर्डर शीट पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की वास्तविक स्थिति समझने के लिए दस्तावेजों का पूर्ण होना आवश्यक है।
निचली अदालत की कार्यवाही
यह पूरा मामला भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में लंबित शिकायत प्रकरण संख्या 03/2018 से जुड़ा है। निचली अदालत ने 13 दिसंबर 2024 को एक समन आदेश जारी किया था, जिसे राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका एमसीआरसी नंबर 13941/2026 के माध्यम से बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दायर की गई है। आवेदक पक्ष का तर्क है कि निचली अदालत में चल रही यह कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। पूर्व में इस मामले को सुनवाई के बाद सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन अब इसमें दोबारा सुनवाई शुरू हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के उदाहरण और दलीलें
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए, जबकि अधिवक्ता राजीव मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने अंतरिम राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के दो प्रमुख फैसलों का संदर्भ दिया। इसमें राहुल गांधी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (एसएलपी डायरी नंबर 31445/2025) और फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म बनाम अमिता सिंह (एसएलपी डायरी नंबर 47139/2025) के आदेशों का हवाला दिया गया। इन फैसलों के आधार पर दलील दी गई कि बीएनएसएस की धारा 223 के प्रावधानों के तहत किसी भी आरोपी को समन जारी करने से पहले उसका पक्ष सुना जाना अनिवार्य है।
ऑर्डर शीट पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने जब रिकॉर्ड का अवलोकन किया तो पाया कि याचिका के साथ केवल 09.05.2025 तक की ही ऑर्डर शीट संलग्न की गई है। इसके बाद की अदालती कार्यवाही का कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि 28.08.2025 को मामले में अगली उपस्थिति तय थी। इस विसंगति पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि 09.05.2025 से लेकर वर्तमान समय तक की सभी प्रमाणित ऑर्डर शीट रिकॉर्ड पर लाई जाएं। कोर्ट ने माना कि बिना पूर्ण विवरण के मामले की गंभीरता और वर्तमान स्थिति का सही आकलन संभव नहीं है।
कार्तिकेय चौहान को नोटिस और आगामी सुनवाई
मामले में अंतरिम आवेदन संख्या 6801/2026 पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने दूसरे पक्ष का पक्ष जानना भी जरूरी समझा। अदालत ने प्रतिवादी कार्तिकेय सिंह चौहान को सामान्य और आरएडी दोनों माध्यमों से नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। इन नोटिसों का जवाब दो सप्ताह के भीतर देना होगा। न्यायालय ने अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 04 मई 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह का समय निर्धारित किया है। उस दौरान दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों के आधार पर यह तय होगा कि निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए या नहीं।


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