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9 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान
केंद्र सरकार की श्रम-विरोधी नीतियों के खिलाफ CTUs और सेक्टोरल फेडरेशनों का संयुक्त ऐलान

9 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वानकेंद्र सरकार की श्रम-विरोधी नीतियों के खिलाफ CTUs और सेक्टोरल फेडरेशनों का संयुक्त ऐलान


नई दिल्ली | 23 दिसम्बर 2025
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और सेक्टोरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की कथित श्रम-विरोधी नीतियों के खिलाफ 9 जनवरी 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया है। यह निर्णय 22 दिसम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में श्रमिकों, किसानों और आम जनता के हितों के खिलाफ लगातार फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे देश में रोजगार, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्तियों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
श्रम संहिताओं पर तीखा विरोध
संयुक्त बयान में कहा गया कि सरकार द्वारा लाई गई चार श्रम संहिताएं मजदूरी संहिता औद्योगिक संबंध संहिता सामाजिक सुरक्षा संहिता व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता
श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों को कमजोर करती हैं। इन संहिताओं के लागू होने से यूनियन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल का अधिकार और रोजगार की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण और SHANTI अधिनियम पर आपत्ति
संयुक्त मंच ने “सर्विस सेक्टर में एनर्जी ट्रांजिशन के लिए एनर्जी सिक्योरिटी (SHANTI) अधिनियम” का भी कड़ा विरोध किया। मंच का कहना है कि यह कानून बिजली उत्पादन और वितरण क्षेत्र में निजी और विदेशी कंपनियों को अत्यधिक अधिकार देता है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र, घरेलू उद्योग और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचेगा।
मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा पर संकट
संयुक्त मंच ने मनरेगा को कमजोर किए जाने, बजट में कटौती और भुगतान में देरी पर भी गंभीर चिंता जताई। मंच का आरोप है कि सरकार रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे निष्प्रभावी बना रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है।
100% FDI और सार्वजनिक संपत्तियों की बिक्री का विरोध
मंच ने विभिन्न क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और राष्ट्रीय संपत्तियों की बिक्री की नीति का विरोध किया। बयान में कहा गया कि इससे देश की आर्थिक संप्रभुता कमजोर हो रही है और रोजगार के अवसर घट रहे हैं।
पर्यावरण और पहाड़ी क्षेत्रों को लेकर चिंता
संयुक्त मंच ने हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनन, निर्माण और पर्यावरणीय मंजूरियों में ढील पर भी चिंता व्यक्त की। मंच का कहना है कि इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।
किसान संगठनों को समर्थन
CTUs ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा घोषित संघर्षों और आंदोलनों को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है और श्रमिक–किसान एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया है।आगे की रणनीति
संयुक्त मंच ने घोषणा की कि जनवरी–फरवरी 2026 के दौरान देशभर में बिजली कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और अन्य श्रमिक वर्गों के साथ संयुक्त सम्मेलन और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
12 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के HKS भवन में राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
सभी श्रमिकों से अपील
संयुक्त मंच ने देशभर के श्रमिकों, कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और आम जनता से अपील की है कि वे 9 जनवरी 2026 की राष्ट्रीय हड़ताल को सफल बनाएं और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों।
हस्ताक्षरकर्ता संगठन
इस संयुक्त बयान पर निम्न प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संगठनों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं
INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF, UTUC सहित अन्य सेक्टोरल फेडरेशन्स।

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