
भजन-कीर्तन व विशाल भंडारे से गांव में छाया उत्सव का माहौल
जहां विकास और संस्कृति साथ चलते हैं
मध्यप्रदेश के हरे-भरे अंचल में बसे अनूपपुर जिले के ग्राम रक्सा-कोलमी में 23 जून 2025 का दिन एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। जहां एक ओर ग्रामीणों की आंखों में भविष्य की चमक थी, वहीं दूसरी ओर वातावरण में घंटियों, शंखध्वनि और भजन की स्वर लहरियाँ गूंज रही थीं। खेतों की हरियाली के बीच, पूजा की अग्नि की आभा, पीले चुनरियों की लहराती छवि और प्रसाद की सुगंध ने इस छोटे से गांव को एक आस्था और औद्योगिक नवचेतना के केंद्र में बदल दिया।



धार्मिक रीति-नीति से प्रारंभ हुआ विकास
सुबह की पहली किरण के साथ गांव के मंदिरों से घण्टियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। अशोक मिश्रा की अधिग्रहीत भूमि पर भूमि पूजन की तैयारियाँ चरम पर थीं। कमल जी ने मुख्य यजमान के रूप में नारियल फोड़कर विधिवत उद्घाटन किया। वैदिक मंत्रों के साथ स्थानीय पुरोहितों द्वारा पूजन सम्पन्न हुआ। समर्थ गोंड, जिनकी सबसे अधिक भूमि इस परियोजना हेतु अधिग्रहीत हुई, उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर पूजा की अगुवाई की, जो उनके भावनात्मक जुड़ाव और पूर्ण सहमति का जीवंत प्रमाण था।
ग्राम देवताओं की पूजा के साथ परंपरागत धार्मिक स्थलों के संरक्षण और पुनर्निर्माण का संकल्प लिया गया। चक्रधर, कैलाश साहू, आदित्य राठौर, राजू राठौर, राम विनय मिश्रा जैसे ग्रामीणों ने इस प्रक्रिया में सहभागिता निभाई।
भूमिपूजन के साथ ही ग्रामीणों ने शुरू कराया निर्माण कार्य



पूजन पूर्ण होते ही बिना किसी औपचारिक आदेश के ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर बाउंड्री वॉल निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया। यह दृश्य न केवल असामान्य था, बल्कि प्रेरक भी—जहां कोई विरोध नहीं, कोई असमंजस नहीं, सिर्फ सहयोग था। कंपनी के इंजीनियर और मजदूर बाद में पहुंचे, लेकिन विकास की नींव गांव के लोगों के हाथों खुद रखी जा चुकी थी।
भक्ति, भोजन और भाईचारा उत्सव का दृश्य
पूरे गांव में एक उत्सव जैसा माहौल था। भजन-कीर्तन के लिए ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम के साथ स्थानीय भजन मंडली जुटी रही। भक्ति रस में डूबे हुए ग्रामीणों ने कीर्तन में भाग लिया, और माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भंडारे में लगभग 2000 महिला-पुरुषों ने प्रसाद ग्रहण किया। कढ़ी-चावल, पूरी, सब्जी और हलवे की खुशबू पूरे गांव में फैल चुकी थी। भंडारे का आयोजन भी पूरी तरह से ग्रामवासियों द्वारा ही स्वेच्छा से किया गया, जिसमें कंपनी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। यह आयोजन न केवल आस्था, बल्कि स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक था।
प्रमुख उपस्थिति और नेतृत्व







सुधाकर पाण्डेय – उपाध्यक्ष, न्यू जोन इंडिया प्रा. लि. सुशील कांत मिश्रा – जूनियर वाइस प्रेसिडेंट
कंपनी के प्रबंधक व स्टाफ
रक्सा-कोलमी के सैकड़ों ग्रामीणों के साथ रहे उपस्थिति चकधर मिश्रा कैलाश शाहू विनय मिश्रा देवघर मिश्रा अर्जुन पटेल रामसजीवन कोदू राठौर मनी राठौर सरपंच उमा सिंह मेल सिंह पूर्व सरपंच अमोल सिंह सहित सम्मानित जन मौजूद रहे।
पुनर्वास, मुआवजा और भविष्य की योजनाएं
इस मौके पर कंपनी ने आश्वस्त किया कि मुआवजा वितरण,सम्मानजनक पुनर्वास,स्थानीय युवाओं को परियोजना में रोजगार,तथा छात्रवृत्ति योजनाएं जल्द चरणबद्ध तरीके से लागू होंगी यह घोषणाएँ ग्रामीणों को विश्वास और आश्वस्ति दोनों दे गईं।
परियोजना की 5 विशिष्ट विशेषताएँ
प्रभावित किसानों और ग्रामीणों द्वारा स्वतः आगे बढ़ कर कार्य की शुरुआत करना
धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण
ग्रामीणों की सहभागिता से निर्माण कार्य आरंभ
पारदर्शी पुनर्वास और रोजगार नीति
सामूहिक भंडारा और भक्ति आयोजन से सामाजिक समरसता

जब विकास होता है साझेदारी से
न्यू जोन थर्मल पावर प्रोजेक्ट अब केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं रहा—यह एक ऐसा मिशन बन गया है, जिसमें गांववालों का पसीना, पूजा और समर्थन मिला हुआ है। जब ग्रामीण स्वेच्छा से आगे आएं, निर्माण खुद शुरू कराएं और पूजा खुद करें—तो ये सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, जन भागीदारी से गढ़ी गई विकासगाथा बन जाती है।
अनूपपुर अब सिर्फ प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि औद्योगिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभर रहा है।



Leave a Reply