पाकिस्तान पर महंगाई और कर्ज का दोहरा हमला, आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत गंभीर से भी बदतर हो चुकी है।
महंगाई दर 30% से ऊपर (अप्रैल 2025),
विदेशी कर्ज करीब 130 अरब डॉलर
रोज़ाना खर्च केवल सैन्य संचालन और कर्ज ब्याज मिलाकर 450-500 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 2 अरब डॉलर — मुश्किल से 2-3 हफ्ते का आयात खर्च
सीधी बात युद्ध छिड़ते ही पाकिस्तान आर्थिक रूप से घुटने टेकने लगेगा।
युद्ध हुआ तो कितने दिन टिकेगा पाकिस्तान? रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार
बाहरी मदद के बिना पाकिस्तान 10 दिन के भीतर हथियार, तेल और आर्थिक संसाधनों की भीषण किल्लत झेलेगा।
चीन या अरब देशों की मदद मिले तो भी पाकिस्तान 15–20 दिन से ज्यादा युद्ध नहीं लड़ सकेगा।
भीतरी विद्रोह बलूचिस्तान, सिंध, गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्रों में बगावत तेज हो जाएगी, जिससे उसकी स्थिति और खराब होगी।
000Miles.com का ओपिनियन
आधुनिक युद्ध हथियारों से कम, और अर्थव्यवस्था से ज्यादा जीते जाते हैं। पाकिस्तान इस मोर्चे पर पहले ही युद्ध हार चुका है।
इतिहास गवाह है भारत से युद्ध और पाकिस्तान की शिकस्त
1947-48 पहला कश्मीर युद्ध
कबायली आक्रमण के साथ कश्मीर पर हमला
भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई
1965 दूसरा युद्ध
पाकिस्तान की ऑपरेशन जिब्राल्टर रणनीति विफल
भारत ने लाहौर तक जवाबी हमला किया
भारी सैन्य नुकसान और आर्थिक तबाही झेली पाकिस्तान ने
पाकिस्तान का दो टुकड़ों में विभाजन
1971बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
पाकिस्तान की क्रूरता के खिलाफ बांग्लादेशी जनता उठी
भारत के हस्तक्षेप से 13 दिन में पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया
90,000 पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सेना के सामने हथियार डाले
1999 करगिल युद्ध
पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारतीय सेना ने धूल चटाई
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना
इस बार क्या अलग है?
पाकिस्तान के पास नहीं है
मजबूत अर्थव्यवस्था
राजनीतिक स्थिरता
अंतरराष्ट्रीय समर्थन
घरेलू एकता
भारत के पास है
चौथी सबसे बड़ी सेना
तेजी से बढ़ती $4 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था
अमेरिका, फ्रांस, रूस इजरायल जैसे बड़े देशों का समर्थन
स्थिर लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकजुटता
अगर युद्ध हुआ तो ?
000Miles.com का विशेष विश्लेषण
बलूचिस्तान, सिंध, गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्र अलगाव के लिए उठ खड़े होंगे
पाकिस्तान का राजनीतिक तंत्र ढह जाएगा
सेना का मनोबल टूटेगा
देश छोटे-छोटे कबीलों में बंट सकता है — ठीक सोलहवीं सदी की तरह जब यह इलाका “पंजाब”, “सिंध”, “बलूचिस्तान”, “पख्तूनिस्तान” जैसे स्वतंत्र कबीलों में बिखरा था।
पाकिस्तान केवल इतिहास के पन्नों में बचेगा।
विशेषज्ञों का कहना है
पाकिस्तान अगर अब भी आतंकवाद और युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की राह नहीं अपनाता, तो अगला युद्ध उसका अस्तित्व ही समाप्त कर देगा।
‘सोलहवीं सदी’ की वापसी पाकिस्तान के टुकड़े?
बलूच राष्ट्रवाद फिर जगेगा
सिंधुदेश आंदोलन बल पकड़ सकता है
पख्तून स्वतंत्रता की मांग बढ़ेगी
गिलगित-बाल्टिस्तान में बगावत होगी
ठीक वैसे ही, जैसे 1500–1600 ईस्वी के दौर में ये क्षेत्र स्वतंत्र कबीलों और छोटे-छोटे राजाओं में बंटा हुआ था।
“एक पाकिस्तान” का सपना मिट जाएगा, और नया नक्शा बनेगा जिसमें कोई केंद्रीकृत सत्ता नहीं होगी।
इसलिए जानकार अपना अंतिम निष्कर्ष निकाल रहे हैं
पाकिस्तान के लिए अब सिर्फ दो ही विकल्प हैं
शांति, सुधार और आर्थिक विकास का रास्ता चुनना,
या
टुकड़ों में बंटकर इतिहास का पाकिस्तान’ बन जाना।
000Miles.com आपके लिए ऐसी गहरी, और विश्लेषण रिपोर्ट्स लाता रहेगा।
आप जुड़े रहिए, जानिए सच्चाई — बिना किसी मुलम्मे के।

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