

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में 8 मार्च 2025 को पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के हेमपुर ओवरब्रिज पर हुई, जब राघवेंद्र अपनी मोटरसाइकिल से सीतापुर की ओर आ रहे थे। हमलावरों ने पहले उनकी बाइक को टक्कर मारकर गिराया और फिर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया。
राघवेंद्र बाजपेई महोली तहसील के विकास नगर निवासी थे और एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र में संवाददाता के रूप में कार्यरत थे। उनकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी। उनके परिवार में पत्नी रश्मि, 10 वर्षीय बेटा आराध्य और 8 वर्षीय बेटी स्मिता हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी राघवेंद्र पर ही थी, क्योंकि उनके बड़े भाई की लगभग 10 वर्ष पूर्व ट्रेन हादसे में मृत्यु हो गई थी। उनके पिता महेंद्र नाथ बाजपेई हनुमान मंदिर के पुजारी हैं और मां गृहिणी हैं。


घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रवीण रंजन के अनुसार, हत्यारों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गई हैं, साथ ही सर्विलांस और एसओजी टीम को भी लगाया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हत्या के पीछे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है。



इस घटना से स्थानीय पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है। महोली विधायक शशांक त्रिवेदी, पूर्व विधायक अनूप गुप्ता समेत कई जनप्रतिनिधि और पत्रकार जिला अस्पताल पहुंचे और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। वहीं, आजाद समाज पार्टी के सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना की निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की है。
राघवेंद्र की हत्या से उनके परिवार और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर है। उनकी पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि उनके पिता अस्पताल में बेहोश हो गए थे। यह घटना पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है और प्रशासन से त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।



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