
अनूपपुर: प्रदेशभर में पुलिस मुख्यालय द्वारा वाहनों से गैरकानूनी हूटर, वीआईपी स्टिकर और डिजाइनर नंबर प्लेट हटाने का फरमान जारी हुआ। लेकिन अनूपपुर की सड़कों पर नजारा कुछ और ही देखने को मिल रहा है। ट्रैफिक पुलिस हर चौराहे पर खड़ी है, पर जिन गाड़ियों पर यह कार्रवाई होनी चाहिए, वे हूटर बजाते हुए पुलिस वालों को ही साइड में कर आगे बढ़ जाती हैं।
नेताओं का जलवा, पुलिस की दुविधा
सत्ताधारी दल से जुड़े छोटे-बड़े नेता सरकारी फरमान को चुनौती देते दिखते हैं। उनके वाहनों पर ‘प्रदेश महासचिव’, ‘जिला प्रभारी’, ‘मंडल अध्यक्ष’, ‘जनसेवक’, ‘संगठन मंत्री’ जैसी पदों की प्लेटें गर्व से चमक रही हैं। उधर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी सिर्फ सरकारी आदेशों की कॉपी जेब में रखे इस कशमकश में हैं कि कार्रवाई करें तो कैसे?


वाहनों में पदनाम या ‘नाम’ की पहचान?
पुलिसिया कार्रवाई में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब कोई युवा ट्रैफिक पुलिसकर्मी किसी गाड़ी को रोकता है, जिस पर ‘विधायक प्रतिनिधि’ या ‘मंत्री समर्थक’ लिखा होता है। अंदर बैठा व्यक्ति गाड़ी का शीशा नीचे करता है और मुस्कराते हुए कहता है – “तुम्हारे साहब को फोन लगाऊं क्या?” और फिर बिना नंबर प्लेट बदले गाड़ी आगे बढ़ जाती है।
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की मानें तो कार्रवाई तो हर हाल में होगी, लेकिन सवाल उठता है कि इस कार्रवाई का दायरा कितना बड़ा होगा? क्या सिर्फ आम लोगों की गाड़ियों से ही डिजाइनर नंबर प्लेट, हूटर और स्टिकर हटाए जाएंगे, या फिर नेताओं और अधिकारियों की गाड़ियों पर भी यही नियम लागू होंगे?
जनता की राय
शहर के एक बुजुर्ग नागरिक तंज कसते हुए कहते हैं, “कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए थोड़ा ज्यादा बराबर होता है!”

प्रदेशभर में कार्रवाई के आदेश तो जारी हो गए हैं, लेकिन असल चुनौती इसे अमल में लाने की है। अनूपपुर की यातायात पुलिस क्या वाकई नेताओं की गाड़ियों से यह अवैध स्टिकर और हूटर हटा पाएगी, या फिर यह अभियान भी सिर्फ आम जनता की गाड़ियों तक ही सीमित रहेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।



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