
बिजुरी कॉलरी में नगर पालिका परिषद द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण कार्यों और उपक्षेत्रीय प्रबंधक की आपत्ति के बीच उठ रहे गंभीर सवाल
बिजुरी कॉलरी अवैध निर्माण कार्यों पर टकराव, करोड़ों रुपये दांव पर!
बिजुरी कॉलरी की अधिगृहित भूमि पर नगर पालिका परिषद द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। SECL के बिजुरी कॉलरी उपक्षेत्रीय प्रबंधक ने नगर पालिका परिषद को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि कॉलरी की अधिगृहित भूमि पर हो रहे निर्माण कार्यों को तत्काल रोका जाए।


इस पत्र के सामने आने के बाद CMO बिजुरी ने सभी ट्रेड यूनियन नेताओं को पत्र भेजकर बैठक बुलाई है, जिसमें यूनियन प्रतिनिधियों से कहा गया है कि वे कॉलरी भूमि पर किए जा रहे विकास कार्यों में अपनी सहमति दें। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भूमि कॉलरी की है, तो नगर पालिका परिषद को बिना स्वीकृति निर्माण कार्य करने की अनुमति कैसे मिली?
बड़े सवाल जो उठते हैं
पहले क्यों नहीं हुई रोक


वर्षों से कॉलरी की अधिगृहित भूमि पर नगर पालिका द्वारा करोड़ों के निर्माण कार्य किए जा रहे थे, लेकिन अब अचानक इस पर आपत्ति क्यों?
क्या कॉलरी प्रबंधन अब तक इन गतिविधियों से अनजान था, या अब किसी अन्य कारण से कार्रवाई हो रही है?
कैसे मिली तकनीकी स्वीकृति (TS)?
टेंडर प्रक्रिया में भूमि की स्वामित्व जानकारी और स्वीकृति आवश्यक होती है।
बिना भूस्वामी की अनुमति के ठेकेदारों को निर्माण कार्य कैसे सौंपा गया?
क्या पार्षदों और नगर पालिका अधिकारियों ने जानबूझकर कॉलरी प्रबंधन को नजरअंदाज किया?

यूनियन प्रतिनिधियों की भूमिका
कॉलरी के यूनियन प्रतिनिधियों को अब बैठक में बुलाकर उनकी सहमति मांगी जा रही है।
क्या वे नगर पालिका परिषद के पक्ष में जाएंगे, या कॉलरी प्रबंधन का समर्थन करेंगे?
क्या यह बैठक सिर्फ कागजी कार्रवाई साबित होगी, या इसमें कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा?
नेताओं का दखल और ठेकेदारों का खेल
कॉलरी प्रबंधन के पत्र के बाद करोड़ों रुपये के ठेके अधर में लटक गए हैं।
ठेकेदारों को नगर पालिका परिषद से कैसे भुगतान मिल रहा था?
क्या इन निर्माण कार्यों में नगर पालिका अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की मिलीभगत है?
प्रबंधन का पत्र कितना प्रभावी होगा?
क्या कॉलरी प्रबंधन अपने पत्र पर कार्रवाई करवा पाएगा, या यह भी नेताओं और ठेकेदारों के दबाव में कचरे के ढेर में चला जाएगा?
प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाएगा?
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि बिजुरी कॉलरी के संपदा अधिकारी , उपक्षेत्रीय प्रबंधक अपने पत्र को कितनी गंभीरता से लागू कराते हैं। यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत होगा कि नेताओं और ठेकेदारों के गठजोड़ के आगे कॉलरी प्रबंधन भी बेबस हो चुका है।
यह मामला केवल कॉलरी प्रबंधन और नगर पालिका परिषद के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और करोड़ों की ठेकेदारी का खेल उजागर करने वाला मुद्दा है।



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