

कोतमा। कोतमा थाना क्षेत्र में एक साधारण होर्डिंग विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अतल व्यौहार के जन्मदिन के अवसर पर समर्थकों ने रेलवे अंडरब्रिज के पास बड़े-बड़े बधाई संदेश वाले होर्डिंग्स लगा दिए। इत्तेफाक से, उस वक्त अतल व्यौहार प्रयागराज महाकुंभ स्नान के लिए गए हुए थे। लेकिन जब लौटे, तो उन्हें सूचना मिली कि कुछ होर्डिंग्स ओम प्रकाश सोनी, जो स्थानीय फ्लैक्स प्रिंटर हैं, ने हटा दिए हैं।
गाली-गलौज से वायरल ऑडियो तक जब नेताजी हुए बेकाबू
हoarding हटाने की खबर मिलते ही अतल व्यौहार ने ओम प्रकाश सोनी से जवाब-तलब किया। कहा-सुनी के बीच नेताजी का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सोनी को कथित तौर पर अशोभनीय गालियां दीं, जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। यह मामला सीधे कोतमा थाना तक पहुंचा, जहां ओम प्रकाश सोनी ने गाली-गलौज और धमकी की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस जांच के बाद अतल व्यौहार के खिलाफ IPC की धारा 296, 351/4 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
भाजपा संगठन की कार्रवाई कारण बताओ नोटिस या दिखावटी कार्रवाई?
जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो भाजपा संगठन भी हरकत में आया। जिले में पार्टी की छवि खराब होते देख भाजपा जिलाध्यक्ष हीरा सिंह श्याम और युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर ने अतल व्यौहार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब देने को कहा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि यह नोटिस एक राजनीतिक औपचारिकता मात्र है या वास्तव में संगठन अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा?
नेताजी का पलटवार अवैध होर्डिंग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी


एफआईआर और नोटिस से बौखलाए अतल व्यौहार ने कोतमा एसडीओपी और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंप दिया। इसमें उन्होंने ओम प्रकाश सोनी के खिलाफ नगर में अवैध होर्डिंग्स का ठेका लेने और व्यापारियों से मनमानी वसूली करने की जांच की मांग की। उन्होंने नगर पालिका और रेलवे प्रशासन से भी सवाल किया कि अगर ओम आर्ट के होर्डिंग अवैध हैं, तो इतने वर्षों से किसके संरक्षण में लगे हैं?
अतल व्यौहार ने धमकी दी कि अगर तीन दिनों में अवैध होर्डिंग नहीं हटाए गए, तो वे आंदोलन करेंगे। यह बयान उनके खिलाफ हुई एफआईआर से ध्यान भटकाने की कोशिश ज्यादा लगती है या फिर वह वास्तव में नगर हित की चिंता कर रहे हैं, यह देखने योग्य होगा।
सवाल उठते हैं नेतागिरी की साख पर धब्बा या शक्ति प्रदर्शन?
यह मामला सिर्फ एक होर्डिंग हटाने का नहीं है, बल्कि राजनीतिक रसूख और सत्ता की हनक का प्रदर्शन भी है। सवाल यह है कि एक जनप्रतिनिधि को क्या सार्वजनिक रूप से किसी को गाली देने का हक है? यदि यह घटना किसी विपक्षी दल के नेता से जुड़ी होती, तो क्या भाजपा इसी तरह खामोश रहती?
भाजपा संगठन के अंदर भी इस प्रकरण को लेकर मौन स्वीकृति का माहौल दिख रहा है। रविंद्र राठौर द्वारा जारी नोटिस महज खानापूर्ति लग रहा है, क्योंकि अब तक पार्टी ने किसी ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत नहीं दिए हैं।
नगर पालिका का पक्ष होर्डिंग्स का राजस्व किसके खाते में?
नगर पालिका अधिकारी प्रदीप झारिया ने स्पष्ट किया कि रेलवे अंडरब्रिज क्षेत्र में लगे विज्ञापन और प्रचार-प्रसार होर्डिंग्स के लिए 10,000 रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होती है। साथ ही, कलेक्टर गाइडलाइन के तहत प्रति सेंटीमीटर के हिसाब से नगर पालिका को राजस्व भी मिलता है।
अब सवाल यह उठता है कि यदि ओम आर्ट के होर्डिंग्स अवैध थे, तो नगर पालिका अब तक मूकदर्शक क्यों बनी रही? क्या इन होर्डिंग्स से वसूले गए पैसे का कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद है या यह भी एक बड़ा घोटाला है?
सत्ता, संगठन और ठेकेदारों का खेल!
यह पूरा मामला केवल एक होर्डिंग के विवाद से कहीं ज्यादा गहरा है। यह दर्शाता है कि सत्ता के करीब होने से नेता खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं।
अतल व्यौहार का गाली-गलौज करना गलत था, लेकिन ओम आर्ट के ठेके की पारदर्शिता भी संदिग्ध है।
भाजपा संगठन ने अभी तक कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, जो सवाल खड़े करता है।
नगर पालिका की भूमिका भी कटघरे में है – अगर होर्डिंग्स अवैध थे, तो इतने वर्षों तक वे कैसे लगे रहे?



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