
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता त्यागने की घोषणा कर दी है। उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया है। इन तीनों नेताओं ने सामूहिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। चड्ढा ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसदों के साथ पाला बदल रहे हैं।
पार्टी छोड़ने के मुख्य कारण
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने पिछले 15 साल इस संगठन को दिए थे, लेकिन अब यह दल अपने बुनियादी सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में संगठन देशहित को प्राथमिकता देने के बजाय निजी हितों को साधने में लगा हुआ है। चड्ढा के अनुसार वे एक गलत संगठन में सही व्यक्ति के तौर पर काम कर रहे थे, जिसके कारण उन्होंने अब स्वयं को इस व्यवस्था से पृथक करने का फैसला किया है।
संगठनात्मक बदलाव और उपजी नाराजगी
इस राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि 2 अप्रैल से तैयार हो रही थी, जब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से मुक्त कर दिया था। उनके स्थान पर अशोक मित्तल को यह दायित्व सौंपा गया था। इस निर्णय के पश्चात राघव ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के बाद से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं।
वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया
राघव चड्ढा के बयानों और रुख पर आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की थी। पार्टी के कई नेताओं ने उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से हटकर चलने के आरोप लगाए थे। संगठन का मानना था कि राघव चड्ढा राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे थे और वे शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णयों की लगातार अनदेखी कर रहे थे। इन्हीं मतभेदों के चलते अंततः उन्होंने भाजपा में जाने का मार्ग चुना।


Leave a Reply