
जबलपुर । दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से बाहर निकालने के गंभीर मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया है कि दिव्यांग बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने साफ तौर पर क6हा कि शिक्षा के अधिकार से वंचित करना पूर्णतः अनुचित है। यह मामला शहर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से जुड़ा है, जिन पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निकालने के आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बच्चों के निष्कासन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
स्कूलों में विशेष शिक्षकों की कमी पर सवाल
याचिकाकर्ता सौरभ सुबैया द्वारा दायर जनहित याचिका में जबलपुर के शैक्षणिक ढांचे की वास्तविक स्थिति को उजागर किया गया है। शहर में संचालित लगभग 50 सरकारी और 200 निजी स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो मूक-बधिर हैं या अन्य शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। याचिका में अधिवक्ता शिवेंद्र पाण्डेय ने तर्क दिया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। अनिवार्य कानूनों का यह उल्लंघन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
अदालत ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वह जबलपुर के सभी निजी और शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्रों की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करें। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि निजी स्कूलों द्वारा बच्चों को बाहर का रास्ता दिखाना उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसी भी बच्चे की शिक्षा बाधित न हो। इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है, जिसमें शासन और शिक्षा विभाग को अपना पक्ष रखना होगा।


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