
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन की ओर से भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की एक बड़ी तबादला सूची को लेकर कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। राज्य सरकार आगामी कुछ दिनों में 25 आईपीएस अफसरों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन कर सकती है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस फेरबदल की जद में प्रदेश के 19 से 20 जिलों के पुलिस कप्तान आ सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ जमीनी स्तर से प्राप्त फीडबैक को काफी महत्व दिया जा रहा है। विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहां पुलिस कप्तानों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
शिकायतों और प्रदर्शन के आधार पर जिलों की छंटनी
गृह विभाग और सचिवालय स्तर पर चल रही बैठकों के बाद यह तथ्य सामने आया है कि करीब 8 जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इसके अतिरिक्त 6 अन्य जिलों के अधिकारियों के विरुद्ध सांगठनिक स्तर पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इन इनपुट के आधार पर सरकार ने कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बदलाव का मन बना लिया है। शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच जैसे जिलों में वर्तमान कप्तानों को हटाकर नई नियुक्तियां करने का निर्णय लिया गया है। वहीं दमोह, सिवनी, आगर मालवा सहित ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े केंद्रों के लिए भी उपयुक्त अधिकारियों के नामों पर विचार विमर्श जारी है।
पदोन्नति के चलते रिक्त होंगे महत्वपूर्ण पद
प्रशासनिक फेरबदल का एक मुख्य कारण अधिकारियों की पदोन्नति भी है। जिन जिलों के एसपी प्रमोट होकर उच्च पदों के पात्र हो गए हैं, वहां नए चेहरों की तैनाती अनिवार्य हो गई है। सूची के अनुसार खंडवा एसपी मनोज राय, भिंड एसपी असित यादव, धार एसपी मयंक अवस्थी और रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान के प्रमोट होने के कारण इन जिलों में कमान बदली जाएगी। इसी क्रम में झाबुआ एसपी डॉ. शिवदयाल, भोपाल के डीसीपी विवेक सिंह और इंदौर के डीसीपी कुमार प्रतीक की जगह भी नए नाम सामने आएंगे। इसके साथ ही रेल पुलिस के अंतर्गत भोपाल में पदस्थ राहुल लोढ़ा और जबलपुर में तैनात सिमाला प्रसाद के कार्यभार में भी बदलाव की संभावना प्रबल है।
संगठन के फीडबैक पर आधारित नई सूची की प्राथमिकता
इस बार की स्थानांतरण नीति में केवल विभागीय आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया गया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनता और संगठन के बीच पुलिस की छवि को भी परखा गया है। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन उन अधिकारियों को प्राथमिकता दे रहा है जो स्थानीय तालमेल बैठाने में सक्षम साबित हुए हैं। जिन जिलों में पुलिस और जनता के बीच संवादहीनता या प्रशासनिक शिथिलता की खबरें थीं, वहां के कप्तानों को लूप लाइन में भेजा जा सकता है। शासन की प्राथमिकता है कि आगामी समय में कानून व्यवस्था की स्थिति को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिसके लिए जिलों में ऊर्जावान और स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों को भेजने की तैयारी है। फिलहाल सरकार के इस आधिकारिक आदेश का इंतजार पूरे महकमे को है।


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