
भोपाल। मध्य प्रदेश में तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव किया है। 15 मई 2026 से प्रभावी हुई नई दरों के अनुसार पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम बढ़ गए हैं। इससे पहले शहर में पेट्रोल 106.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.91 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा था। अब नई दरों के लागू होने के बाद पेट्रोल की कीमत बढ़कर 109.79 रुपये और डीजल 95.00 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। अचानक हुई इस वृद्धि ने आम नागरिकों की जेब पर सीधा बोझ डाल दिया है।
वैश्विक तनाव और बाजार के हालात
ईंधन की कीमतों में हुए इस इजाफे के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को मुख्य वजह माना जा रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और अस्थिरता के कारण कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की सप्लाई और कीमतों पर गहरा असर पड़ा है। तेल कंपनियों का तर्क है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से उनकी लागत में भारी बढ़ोतरी हुई थी। इसी दबाव को कम करने के लिए कीमतों में संशोधन करना उनके लिए जरूरी हो गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी यह तनाव आने वाले दिनों में भी बाजार को प्रभावित कर सकता है।
माल ढुलाई और रसद लागत पर असर
डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की इस तेजी ने परिवहन क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। ट्रक ऑपरेटरों और परिवहन संघों का मानना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई के खर्च में भारी इजाफा होगा। इसका सीधा प्रभाव रसद यानी लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ेगा। जब परिवहन महंगा होता है, तो बाजार में आने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ जाते हैं। परिवहन संघ इस स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं क्योंकि इससे उनके व्यापारिक मुनाफे पर भी असर पड़ रहा है।
आम जनता और कृषि पर प्रभाव
ईंधन की नई कीमतों का असर केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों और विशेषकर कृषि क्षेत्र पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेगा। खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए चलने वाले पंपों में डीजल का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी। वहीं शहरों में सब्जी, दूध और अन्य किराना सामानों की कीमतों में भी वृद्धि की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इन वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह से सड़क परिवहन पर निर्भर है।


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