ई-एफआईआर में छेड़छाड़ के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त, वीडियो रिकॉर्डिंग में बयान दर्ज करने के निर्देश

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता का बयान वीडियो कैमरे की उपस्थिति में दर्ज किया जाए।

मामला डॉ. अंजलि मिश्रा द्वारा शंकराचार्य नगर कालोनी बाग सेवनिया भोपाल के पदाधिकरियों के विरुद दायर याचिका (डब्ल्यूपी क्रमांक 13765/2026) से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा दर्ज कराई गई ई-एफआईआर में सभी आरोपियों के नाम शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल चुनिंदा व्यक्तियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की। साथ ही, यह भी आरोप है कि पुलिस ने ई-एफआईआर की मूल सामग्री के अनुरूप मामला दर्ज नहीं किया और आरोपों को कमजोर किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली एवं अधिवक्ता अमित रायज़ादा ने पक्ष रखते हुए कहा कि अब तक धारा 161 सीआरपीसी के तहत याचिकाकर्ता का बयान भी दर्ज नहीं किया गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को विस्तृत स्थिति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

माननीय न्यायाधीश बीपी शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब भी याचिकाकर्ता का बयान दर्ज किया जाए, वह वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। न्यायालय ने प्रकरण में प्रतिवादी क्रमांक 5 से 14 तक को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए हैं तथा मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

इस आदेश को पुलिस जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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