
नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग के गठन के करीब 6 महीने बाद कर्मचारी संगठनों के साथ पहली बैठक हुई. इसमें मिनिमम सैलरी से लेकर सालाना इंक्रीमेंट सहित कई मुद्दों पर बातचीत की गई. कर्मचारी संगठन नेशनल काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी एनसी-जेसीएम) ने 51 पेज का ज्ञापन आयोग को सौंपा. इसमें 69 हजार रुपये मिनिमम सैलरी के साथ 6 फीसदी सालना इंक्रीमेंट की डिमांड की गई है.
कर्मचारी संगठन ने फिटमेंट फैक्टर को 3.833 रखने की भी डिमांड की है. फिटमेंट फैक्टर ही वह टूल होता है, जिसके आधार पर आयोग कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने पर फैसला करता है. आयोग के साथ बैठक में कर्मचारी संगठन ने डिमांड की है कि सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी किया जाए, क्योंकि महंगाई की वजह से लागत इससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ती है. इसका सीधा बोझ कर्मचारियों पर पड़ता है, लिहाजा उनकी सैलरी का इंक्रीमेंट भी महंगाई के सापेक्ष होना चाहिए.
एचआरए के ढांचे में बदलाव हो
केंद्र सरकार ने 17 जनवरी, 2025 को 8वें वेतन आयोग को नोटिफाई किया था, जिसे 1 जनवरी 2026 से लागू किए जाने का अनुमान है. कर्मचारी संगठनों की ओर से की गई डिमांड में सबसे अहम एचआरए के ढांचे में बदलाव है, जो शहरों के आधार पर तय किया जाना चाहिए. एचआरए में बड़े शहरों के लिए बेसिक सैलरी का 40 फीसदी एचआरए, जबकि टीयर 2 शहरों के लिए 35 फीसदी और टीयर 3 शहरों के लिए 30 फीसदी एचआरए की डिमांड की गई है.
एचआरए को महंगाई भत्ते से जोड़ा जाये
कर्मचारी संगठन की ओर से वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों के एचआरए को महंगाई भत्ते के साथ जोड़ दिया जाना चाहिए, ताकि उन्?हें मिलने वाला भत्ता महंगाई के सापेक्ष स्वत: रिवाइज किया जा सके. साथ ही हर 5 साल में शहर के वर्गीकरण की भी सुविधा मिलनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में आयोग ने कर्मचारी संगठनों की सभी मांगों को गंभीरता से सुना. उनके साथ अर्थशास्त्री पुलक घोष और पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन भी सदस्य सचिव के रूप में मौजूद थे.
आयोग की रिपोर्ट जारी होने की ये है डेडलाइन
8वें वेतन आयोग ने गठन के बाद पहली बार कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत की है. माना जा रहा है कि आगे इस तरह की और भी बैठकें की जानी है. आयोग ने सभी हितधारकों से 20 अप्रैल तक अपने सुझाव देने के लिए कहा है. हालांकि, इसके बाद दूसरे राउंड की बातचीत शुरू की जाएगी. आयोग को अपने गठन के 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार के पास सौंपनी है.


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