लातूर के मदरसे का हवाला देकर ले जाए जा रहे थे 167 बच्चे, कटनी में प्रशासन ने रोका

जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत कटनी स्टेशन पर शनिवार 11 अप्रैल की देर रात एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर रेलवे सुरक्षा बल और अन्य विभागों की टीम ने पटना-पुणे एक्सप्रेस में दबिश देकर 167 बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। इस सघन अभियान के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए जांच तेज कर दी है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार इन बच्चों को बिहार के विभिन्न जिलों से महाराष्ट्र की ओर ले जाया जा रहा था।

​संयुक्त टीम की घेराबंदी, तलाशी अभियान

​आरपीएफ थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह को पुख्ता सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 12150 पटना-पुणे एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों को संदिग्ध स्थितियों में ले जाया जा रहा है। जैसे ही ट्रेन कटनी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर आकर रुकी, आरपीएफ, जीआरपी, महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण अधिकारियों की संयुक्त टीम ने चिन्हित बोगियों की घेराबंदी कर ली। जांच के दौरान ट्रेन के कोच एस1, एस2, एस3, एस4 और एस7 में इन बच्चों के मौजूद होने की पुष्टि हुई। सुरक्षा बलों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी बच्चों को ट्रेन से उतारकर अपनी अभिरक्षा में ले लिया।

​मदरसे के नाम पर स्थानांतरण की पड़ताल

​कार्रवाई के दौरान बच्चों के साथ मौजूद सद्दाम नामक व्यक्ति से प्रारंभिक पूछताछ की गई। सद्दाम ने स्वयं को महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक मदरसे का शिक्षक बताते हुए दावा किया कि वह इन बच्चों को बिहार के अररिया जिले से शिक्षा के लिए ले जा रहा था। उसके अनुसार 100 बच्चों का समूह उसकी जिम्मेदारी में था, जबकि शेष बच्चों को अन्य लोग लेकर चल रहे थे। सद्दाम का कहना है कि वह पिछले 10 वर्षों से बच्चों को लाने-ले जाने का कार्य कर रहा है और लातूर के मदरसे में सभी विषयों की शिक्षा दी जाती है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर बच्चों के स्थानांतरण के लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेजों और अनुमति पत्रों की कमी को देखते हुए प्रशासन इन दावों की गहराई से जांच कर रहा है।

​बाल सुरक्षा विभाग द्वारा काउंसलिंग

​बाल सुरक्षा अधिकारी मनीष तिवारी के नेतृत्व में विभाग की टीम बच्चों की काउंसलिंग कर रही है। विभाग को आशंका है कि इन बच्चों को महाराष्ट्र ले जाकर बाल मजदूरी या अन्य अवैध गतिविधियों में लगाया जा सकता था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी 167 बच्चों को आरपीएफ थाने ले जाया गया, जहां उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग अब बच्चों के निवास स्थान के प्रमाण पत्रों और उनके माता-पिता से संपर्क कर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने में जुटा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे समूह का वास्तविक संचालक कौन है और इसका उद्देश्य क्या था।

​कानूनी प्रक्रिया और प्रशासन का एक्शन

​रेलवे पुलिस और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह के मुताबिक जब तक प्रत्येक बच्चे के अभिभावकों से बात नहीं हो जाती और स्थानांतरण का वैधानिक कारण स्पष्ट नहीं होता, तब तक बच्चों को सरकारी निगरानी में ही रखा जाएगा। पुलिस इस मामले में मानव तस्करी के नेटवर्क की संभावना को भी तलाश रही है। यदि जांच के दौरान दस्तावेजों में हेराफेरी या किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और जांच जारी है।

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