
जबलपुर। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से जुड़े बहुचर्चित हवाला लूटकांड में राज्य के हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। घटना 8 अक्टूबर 2025 की रात की है जब पुलिस की एक विशेष टीम ने सीलादेही चौक पर एक वाहन को रोका था। इस वाहन में महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार यात्रा कर रहे थे। तलाशी के दौरान उनकी कार से 2.96 करोड़ रुपये की भारी नकदी बरामद की गई थी। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उस समय की एसडीओपी पूजा पाण्डेय कर रही थीं। इसके बाद विभाग को यह शिकायत मिली कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की जब्ती को ही दर्ज किया गया। इस बड़ी अनियमितता के सामने आने के बाद लखनवाड़ा थाने में 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया, जिसमें तत्कालीन एसडीओपी पूजा पाण्डेय और डीएसपी पंकज मिश्रा के नाम भी शामिल थे।
हाईकोर्ट की ओर से की गई महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई अहम कानूनी बिंदुओं पर प्रकाश डाला। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप महज अनुमान और संदेह पर आधारित हैं। केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर किसी भी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश ने पाया कि साजिश के आवश्यक तत्व इस मामले में कहीं भी स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यदि इस स्थिति में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है, तो यह कानून की प्रक्रिया का सीधा दुरुपयोग होगा।
डीएसपी समेत तीन लोगों को मिली बड़ी राहत
इन सभी तथ्यों और तर्कों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने तीन प्रमुख याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से निरस्त करने का आदेश दिया है। इस फैसले का लाभ डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी और जबलपुर के स्थानीय व्यापारी पंजू गिरी को प्राप्त हुआ है। इन तीनों व्यक्तियों को इस आपराधिक मामले से बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें कानूनी उलझनों से काफी हद तक मुक्ति मिल गई है।
अन्य आरोपियों के खिलाफ जारी रहेगी कानूनी कार्रवाई
इस राहत के बावजूद मामले का यह पहलू भी सामने आया है कि अन्य आरोपियों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की पूरी संभावना है। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से मीडिया और जनमानस के बीच चर्चा में रहे इस पूरे प्रकरण में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। इस निर्णय के पश्चात मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में अचानक हलचल तेज हो गई है। उच्च अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा अब इस आदेश के विस्तृत पहलुओं के अध्ययन और आगे की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।


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